Monday, 25 April 2016

kaun ho tum

तेज धुप में ,
गुलमोहर की छाँव से तुम....
तेज़  बारिशों  मे ,
घने  कचनार  से  तुम....
कोहरे  से भरी  सर्द  सुबहो  में ,
अलाव में शेष  आग से  तुम ..
तुम  कौन  हो मेरे ?
पूछती हु स्वयं  से ...
मेरे प्रत्याशित जीवन में,
अप्रत्याशित से तुम....
अनंत  संभावनाओं  से परिपूर्ण.....
मेरे प्रेम का अंतिम  पड़ाव हो तुम....... 

4 comments:

  1. बहुत बढ़िया वकील साहिबा
    लिखते रहिए।

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  2. गुलमोहर से ज्यादा लगाव है आपको... :))

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