Friday, 17 June 2016

yowan

उसका यौवन -
हवा में  झूमते अमलतास के फूलों के गुच्छे सा
खिला -खिला /भरा -भरा  !
तुमने छुआ तो ;
वह फूल -फूल सी बिखर गयी...
तुम्हारे गालों पे /होंठो पे...
गर्दन पे और सीने पे !!
उसकी गंध से तुम महकने लगे
वह बिखरती रही....
तुम  समेटते  रहे
रूप /गंध /प्रेम /स्पर्श
सिर्फ शब्द न रहे ;
जीवंत हो गए..
उस क्षण में ,जब वह लावण्या
तुम पर झरती रही /
लजाती रही /सिमटती रही
तुम्हारे भीतर; समाहित
अंतहीन गहराईयों में !!!



 

6 comments:

  1. अद्भुत .. वाह

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  2. शब्द क्रियमान हो गए हैं| शब्दों ने यौवन और यौवन प्रेरित प्रेम को जीवंत कर दिया है| यौवन का ताप, मधुर मिलन की सूक्ष्मता और गहन प्रेम का गाम्भीर्य - तीनो का मोहक सम्मिश्रण

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