ये स्याह बदलियां ;
तुम्हे मेरे बालों सी लगती है..काली / घनेरी
बारिश की बूंदे -
मानों मेरे गीले बालों से झरता पानी
तुम्हारे चेहरे को चूमता ;
हर बूँद एक चुम्बन सी
भीगी -भीगी ,महकी सी !
तुम बूँदों को गिरने नहीं देते
अपनी खुली हथेलियों से थाम लेते हो
मेरी छुअन का अहसास -
इन बूँदों में खोजते हो ..
में होती हूँ इनमे .. हमेशा ...
बरसती हुई ;आती हूँ
तुम्हारे पास ...
इन बारिशों में ,साथ भीगने !!
तुम्हे मेरे बालों सी लगती है..काली / घनेरी
बारिश की बूंदे -
मानों मेरे गीले बालों से झरता पानी
तुम्हारे चेहरे को चूमता ;
हर बूँद एक चुम्बन सी
भीगी -भीगी ,महकी सी !
तुम बूँदों को गिरने नहीं देते
अपनी खुली हथेलियों से थाम लेते हो
मेरी छुअन का अहसास -
इन बूँदों में खोजते हो ..
में होती हूँ इनमे .. हमेशा ...
बरसती हुई ;आती हूँ
तुम्हारे पास ...
इन बारिशों में ,साथ भीगने !!
श्रृंगार लिखने में जो स्थान आपका है, वो अनूठा है.. बारिश की बूंदों की सहजता कैसे किसी क्षण में उतारी है, देखते बनता है.. शुभकामनायें।
ReplyDeleteशुक्रिया राहुल:)
ReplyDeleteबहुत ही अच्छा
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत लिखा :)
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत लिखा :)
ReplyDeleteबहुत सुन्दर लिखा बिलकुल अपने जैसा:)
ReplyDeleteबहुत सुन्दर लिखा बिलकुल अपने जैसा:)
ReplyDeleteचित्रण ऐसा कि.. किसी का 'बून्द'औ किसी का 'हथेली'बन जाने को जी चाहने लगे.
ReplyDeleteसुंदर और रोमांटिक रचना.
This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteखूबसूरत।
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteGreat post ! Wish I could also write in Hindi ! 🍎🍎🍎🍎
ReplyDeleteबढ़िया बिम्ब! बधाई !!!
ReplyDeleteखूबसूरत
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