Monday, 20 June 2016

barish

ये स्याह बदलियां ;
तुम्हे मेरे बालों सी लगती है..काली / घनेरी
बारिश की बूंदे -
मानों मेरे गीले बालों से झरता पानी
 तुम्हारे चेहरे को चूमता  ;
हर बूँद एक चुम्बन  सी
भीगी -भीगी ,महकी सी !
तुम बूँदों को गिरने नहीं देते
अपनी खुली हथेलियों से थाम लेते हो
मेरी छुअन का अहसास -
इन बूँदों में खोजते हो  ..
 में होती हूँ इनमे  .. हमेशा ...
बरसती हुई ;आती हूँ
तुम्हारे पास ...
इन बारिशों में ,साथ भीगने !!

14 comments:

  1. श्रृंगार लिखने में जो स्थान आपका है, वो अनूठा है.. बारिश की बूंदों की सहजता कैसे किसी क्षण में उतारी है, देखते बनता है.. शुभकामनायें।

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  2. शुक्रिया राहुल:)

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  3. बहुत ही अच्छा

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  4. बहुत खूबसूरत लिखा :)

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  5. बहुत खूबसूरत लिखा :)

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  6. बहुत सुन्दर लिखा बिलकुल अपने जैसा:)

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  7. बहुत सुन्दर लिखा बिलकुल अपने जैसा:)

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  8. चित्रण ऐसा कि.. किसी का 'बून्द'औ किसी का 'हथेली'बन जाने को जी चाहने लगे.
    सुंदर और रोमांटिक रचना.

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  9. This comment has been removed by the author.

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  10. Great post ! Wish I could also write in Hindi ! 🍎🍎🍎🍎

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  11. बढ़िया बिम्ब! बधाई !!!

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